शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

सर्दियों का एक स्वप्न

आज एक अंग्रेजी पत्रिका में मुझे फ़्रांसिसी कवि ऑर्थर रिम्बौद (Arthur Rimbaud) कि एक सुन्दर कविता "अ ड्रीम फॉर विंटर" पढने को मिली. यह कविता एक सुन्दर अनुभूति है और भाव प्रवण भी .एकाएक  मन में ख्याल आया कि इसका हिंदी भावार्थ कर के देखना चाहिए बस फिर क्या था ...



सर्दियों में जब हम निकल पड़ेंगे 
यात्रा करने  रेल के नीले डिब्बे में
जिसमे होंगे सफ़ेद तकिये ,
निश्चिन्त और आरामदायक 
जिसके हर मुलायम कोनों पर होंगे
चुम्बनों के अम्बार बिखरे हुए 

तुम अपनी आँखे बंद कर लोगी 
जिससे तुम खिडकी के बहार 
नहीं देख पाओगी,
सांझ की उतरती परछाइयाँ,
वो रिरियाती भीड़ भाड़,या 
धूर्त भेडिये या काले कुत्ते 

अब तुम महसूस करोगी 
तुम्हारे गालों पर खरोंचे 
इक मखमली चुम्बन मानो,
एक मतवाली मकड़ी 
तुम्हारी गर्दन पर फिसल गई हो 

और तुम मुझसे कहोगी 
अपना सिर पीछे झुकाकर
"ढूंढो उसे "
और मै उस जीव को ढूढने में 
एक लंबा समय लगाऊंगा 
जो इधर उधर बहुत भागता है 

2 टिप्‍पणियां:

  1. धन्यवाद सौरभ शर्मा जी ...कोशिश करूँगा की एक और कविता को अनूदित कर पाऊँ ,कविता को अनूदित करना बड़ा सावधानी का और जोखिम भरा काम हैं ...क्योंकि कवि की संवेदनाएं अनुवाद करते हुए जस की तस रखनी होती हैं

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